राना ने बताया कि उनका अपना बचपन भी राम नाईक के बचपन की तरह ही कठिनाइयों और कशमकश में गुजरा है इसलिए उनकी किताब पढ़ते हुए बहुत बार आंखे भीग गई।

राम नाईक ने राना का गर्मजोशी से राजभवन में स्वागत किया और कहा कि वह भी श्री मुनव्वर राना का लेख पढ़कर भावुक हो गए। नाईक ने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि उनकी किताब को पढ़ आत्मविभोर होकर मुनव्वर राना जैसे देश के जाने माने विख्यात साहित्यकार और कवि ने लेख लिखा, वह उनके शुक्रगुजार हैं। उन्हांेने इस अवसर पर बताया कि उनके संस्मरण ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के उर्दू अनुवाद का दूसरा संस्करण भी जल्द ही आने वाला है।
















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