राना ने बताया कि बीमारी के दौरान उन्हें पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का उर्दू संस्करण मिला, जिसे उन्होंने पढ़ना शुरु किया तो वह पढ़ते ही चले गए और इस दौरान कई बार उनकी आंखों से बेअख्तियार आंसू गिरते रहे। उन्होंने बताया कि राम नाईक ने गरीबी में होश संभाला और अपने परिश्रम के बल पर 3 बार विधायक, 5 बार सांसद फिर केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बने।

उन्होंने पुस्तक के अंश के हवाले से बताया कि अपने पिता जी के शव को मुंबई से अपने गृृह जनपद ले जाने का संस्मरण बहुत भावुक कर देने वाला है। उमा चाची ने जब उनसे बम्बई में कहा कि यहां चाय पीना सीख लो, यहां तुम्हें कोई दूध नहीं पूछेगा, जैसे जुम्ले उनके संस्मरण को समृद्ध बनाते हैं।
















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