जहां सईद ने कहा कि उसे पाकिस्तान सरकार ने उसे कश्मीरियों की आवाज बुलंद करने से रोकने के लिए हिरासत में लिया है. हालांकि उसकी दलीलों को गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया है.
न्यायिक समीक्षा बोर्ड में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के जज एजाज अफजल खान, लाहौर हाईकोर्ट की जज आएशा ए मलिक और बलूचिस्तान हाईकोर्ट के जज जमाल खान मंदोखल शामिल थे.
उन्होंने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सईद और उसके साथियों जफर इकबाल, अब्दुल रहमान आबिद, अब्दुल्ला उबैद और काजी कासिफ नियाज को हिरासत में लिए जाने को लेकर 15 को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरा रिकॉर्ड सौंपे. बोर्ड ने अगली सुनवाई में पाकिस्तान के एटॉर्नी जनरल को भी उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं.
सईद लश्कर ए तैयबा का भी संस्थापक है, उसे और उसके साथियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में बोर्ड के सामने पेश किया गया. इस दौरान सईद के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट के बाहर जमा थे. सईद के वकील एके डोगर भी कोर्ट पर मौजूद थे, लेकिन सईद ने बोर्ड के सामने खुद ही अपनी दलील रखी.
सईद ने सरकार द्वारा लगाए आरोपों पर कहा कि किसी भी संस्था द्वारा ये आरोप उस पर साबित नहीं हुए हैं. उसने कहा कि कश्मीर की आजादी के लिए आवाज उठाने और कश्मीर मुद्दे पर सरकार की कमजोर नीति की आलोचना करने की वजह उसे और उसके संगठन को निशाना बनाया गया है.















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