इसलिए नौ साल चार महीने और 28 दिन बाद अब ये सवाल फिर से सिर उठाएगा कि आखिर आरुषि और हेमराज को किसने मार? सीबीआई के धुरंधर अफसर अरुण कुमार और उनकी टीम क्या इस सवाल का जवाब देना चाहेगी? आज देश यही जानना चाहता है.
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