इलाहाबाद हाई कोर्ट का ये फैसला चौंकाता नहीं है. क्योंकि सीबीआई ने अपनी जांच में चौंकाने वाली कोई चीज ढूंढी ही नहीं थी. इलाहाबद हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को अब बरी किया है. जबकि सच्चाई तो ये है कि आरोपी बनाने से पहले सीबीआई खुद ही तलवार दंपति को बरी कर चुकी थी. दिसंबर 2010 में अदालत में केस बंद करने की अर्जी तक दे चुकी थी. वो तो अदालत ने फटकार लगाई तो केस बंद करने वाली अर्जी को ही आरोप पत्र में बदलना पड़ा. अब ऐसे केस का क्या हश्र होगा इसका अंदाजा कानून की जरा सी भी समझ ऱखने वाला आसानी से लगा सकता है.














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