लखनऊ मीडिया संस्थानों और उसमें काम करने वाले लोगों को भाषा और उसके सही उच्चारण की जानकारी देने के लिये स्वंय सेवी संस्था किश्वरी कनेक्ट ने एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें उर्दू और हिन्दी के विद्वानों ने भाग लिया।

स्थानीय गोमती नगर स्थित ओपन एयर रेस्त्रां में आयोजित तलफफुज़ और मीडिया कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुऐ प्रो0 साबरा हबीब ने कहा कि कि जबान का ताअलुक किसी भी मज़हब से नहीं होता है और जहाँ तक उर्दू का ताअअलुक है वह आम आदमी की जुबान है और उर्दू ज़बान में जो मिठास है वह उसको दुसरी ज़बान में नहीं है।
इस अवसर पर उर्दू की जानकार सबीहा अनवर ने कहा कि आज के दौर में मीडिया की ताकत किसी से छुपी नहीं है और इसी वजह से मीडिया की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है। मीडिया आम जनता के लिये एक पुल की तरह काम करता है इसीलिये जरूरी है कि मीडिया के लोग जिस भी जबान में काम करें उसके लोगों को ज़बान की सही समझ और अल्फाज़ों पर सही पकड़ का होना जरूरी है।
उर्दू की मशहूर जानकार आयशा सिददीकी ने कहा कि लखनऊ को इल्म, अदब और मुरव्वत के शहर के तौर पर जाना जाता है इसलिये लखनऊ से ताअअलुक रखने वाले लोगों को बाज़ौक और ज़बान का सही जानकार होना जरूरी है।
इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुऐ लखनऊ विश्वविधालय के उर्दू विभाग के पूर्व विभागअध्यक्ष डा0 प्रो0 अनीस अशफाक़ ने कहा कि वैसे तो सभी लोगांे को अपनी ज़बान पर पूरी तरह से कमाण्ड होनी चाहिये लेकिन मीडिया के लोगों को तो अपनी जुबान पर तरह से सटीकता होनी चाहिये क्योकि मीडिया के लोग जो बोलते है या वह जो लिखते है वह आम लोगों तक सीधा पहुँचता है और फिर वही शब्द आम चलन में आ जाते है।
कार्यक्रम के अंत में इस कार्यक्रम की आयोजक और किश्वरी कनेक्ट की कर्ताधर्ता और वरिष्ठ पत्रकार कुलसुम तल्हा ने कहा कि आजकल यह देखने में आ रहा है कि मीडिया मेें काम करने वाले लोग कुछ लोग अल्फाज़़ों की सही अदायगी नहीं कर पाते है जिसके कारण वह उर्दु अदब के विद्वुान और जानकार लोग उनकी विद्वनता पर प्रश्नचिहन लगाते है। जबकि वह ऐसा अज्ञानता की वजह से नहीं बल्कि शब्दों की सही जानकारी ना होने की वजह से ऐसा हो जाता है। बाद में कुलसुम तल्हा ने इस कार्यक्रम में तशरीफ लाने वाले सभी लोगांे का धन्यवाद किया।














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