उल्लेखनीय है कि लड़की का नाम संतोषशी कामारी था और उसने आठ दिनों से कुछ भी नहीं खाया था। उनकी मां ने बताया कि दुर्गा पूजा की वजह से स्कूल बंद थी, जिसकी वजह से उनकी बेटी को मिडडे मील भी नहीं मिल सका, और मेरी बेटी भात (चावल) मांगते मांगते ही दम तोड़ गई।
संतोषी जलडिगा सेक्शन की पतिअम्बा पंचायत करिमती गाँव की रहने वाली थी। बीपीएल रेखा से नीचे जीवन गज़ारने वाली संतोषी परिवारों में से किसी के पास भी नौकरी नहीं है, और न ही स्थायी आय का कोई साधन है, जिसकी वजह से पूरा परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाली सरकारी राशन पर पर ही निर्भर है।















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