छह मार्च 2002 को दंगों के बाद सरकार ने ट्रेन में आग लगने और उसके बाद हुए दंगों की जांच करने के लिए एक आयोग नियुक्त किया।
25 मार्च 2002 को केंद्र सरकार के दबाव में तीन मार्च को आरोपियों पर लगाए गए पोटा को हटा लिया गया।
18 फरवरी 2003 को एक बार फिर आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद संबंधी कानून लगा दिया गया।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई भी न्यायिक सुनवाई होने पर रोक लगा दी थी।
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