सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद आतिशबाजी चलाने को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. लेकिन वो कितनी खतरनाक है इसका अंदाज़ा चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन, पुणे की 2016 की रिपोर्ट से पता चलता है. जो साधारण सी दिखने वाली आतिशबाजी जैसे फुलझड़ी, अनार, चखरी और सांप की गोलियां बच्चे सबसे ज़्यादा जलाते हैं, वो ही सबसे ज्यादा स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ख़तरनाक है.
प्रकाश का त्योहार दिवाली हम इंसानों की गलती के चलते धुएं और प्रदूषण का प्रतीक बनता जा रहा है. हालात इतनी गंभीर हो चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट को दिवाली से पहले आतिशबाजी बेचने पर बैन का निर्देश देना पड़ा. बीते साल 2016 में मानकों का उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा था कि PM 2.5 खतरनाक स्तर तक पहुंच गया.



















