बाबरी मस्जिद की मिलकियत के बारे मैं बार बार सरकारों और विभिन्न संगठनों की ओर से बात चीत का दौर चलता है मगर नतीजा कुछ भी नहीं निकलता है.

श्री श्री रवि शंकर बहुत दिनों से अयोध्या की बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर निर्माण के लिये मुसलमानों के लीडरों ओर उलेमा से विनती करते नज़र आते हैं. श्री श्री ने अब तक इस सिलसिले मैं कई दौर की वार्ताएं की हैं .उन्होने उलेमा के अतरिक्त आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जीमेदारों से भी बार बार मुलाक़ात की है ओर ज़ोर दिया है कि मुस्लमान अयोध्या की बाबरी मस्जिद से अपना हक़ छोड़ दें
उधर आम मुसलमानों की बात करने वाले लोगों का कहना है कि जो लोग श्री श्री के कहने पर उनकी दहलीज़ पर गये थे वह श्री श्री को यह क्यों नहीं समझाते की अदालत का फैसला न मानने को समझें की देश संविधान और क़ानून से चलता है .
अली कांग्रेस की चेयरपर्सन रुबीना मुर्तुज़ा ने कहा है कि श्री श्री मंदिर समर्थकों को यह क्यों नहीं समझाते कि वो देश की सब से बड़ी अदालत का फैसला ही माने .
रुबीना मुर्तुज़ा ने कहा कि उलेमा को भी यह ज़ोर से कहने की ज़रुरत है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य होगा.देश क़ानून और इन्साफ से चलता है इस लिए अगर सर्कार या अन्य कोई वर्ग न इंसाफ़ी कर रहा है तो मुल्क की सर्वोच्य अदालत ही सही और सच्चा फैसला करेगी .
गुरुवार को बंगलौर में एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें लखनऊ में प्रमुख उलेमा की मेजबानी हुई। सलमान हुसैनी नदवी (दर अल उलूम नदवतुल उलमा) सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन ज़फर फ़ारूक़ी ,अनीस अंसारी (पूर्व आइए और उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जो अब कांग्रेस में शामिल हो गए चुके हैं ‘अतहर हुसैन और मोहम्मद इमरान एडवोकेट नाम उक्त बैठक में भाग लेने वाले लोगों में उल्लेखनीय हैं ।
एक विवादास्पद वक्तव्य के कारण पद छोड़ने वाले दौबंद के सर्वोच्च आलिम गुलाम मोहम्मद दस्तानवी भी बैठक में शामिल थे। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, लखनऊ को पहले ही श्री श्री रवि शंकर के साथ नामित किया जा चुका है। पहली बैठक 20 जनवरी को हुई और दूसरी बैठक 3 फरवरी को थी। पहली बैठक में, श्री श्री रवि शंकर, दूरी की बैठक में एक प्रतिनिधि को पेश करते हुए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को संबोधित करते हुए।
इन दोनों बैठकों का आयोजन महांगार में व्यक्ति के निवास पर हुआ था, जो इन बैठकों का एक महत्वपूर्ण चेहरा है। पहली बैठक में जमाते इस्लामी (पूर्वी यूपी) के एक महत्वपूर्ण अधिकारी के अलावा मौलाना मुस्तफ़ा नदवी और चांसलर इंटीग्रल विश्वविद्यालय वसीम अख्तर भी मौजूद थे।
बैठक में मौजूदा एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहली बैठक में श्री श्री रविशंकर ने अपने संबोधन में साफ तौर कहा था कि मुसलमानों को यह भूल जाना चाहिए कि अयोध्या में अब इस स्थान पर बाबरी मस्जिद का निर्माण होगा जहां यह पहले थी
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रविशंकर इस बात पर भी कोई आश्वासन देने में असमर्थ थे कि अगर मुसलमान बाबरी मस्जिद की भूमि पर अपने अधिकार से वापस जाने के लिए तैयार हो जाएं तो हिन्दू वर्ग किसी भी मस्जिद के लिये कभी दावा नहीं करेगा
बैठक में मौजूद इन लोगों ने बताया कि श्री श्री रविशंकर इस बात पर ज़ोर दीते रहे कि पहले तो आप लोग मस्जिद के अधिकार से अलग हो जाएं तो बाकी बातें बाद में होगीं .। दूसरी ए.आर. ओर अनुच्छेद 341 (पसमांदा मुसलमानों को सुरक्षा से संबंधित अधिनियम) को समाप्त करने और पसमानदा मुसलमानों को भी आरक्षण की श्रेणी में लाने की लगातार वकालत करने वाले पूर्व अधिकारी इस बात के पक्ष में बात करते रहे कि अगर इस अनुच्छेद की खामियों को दूर करने की गारंटी दी जाए तो बाबरी मस्जिद पर समझौते की बात की जा सकती है।
















