नई दिल्ली. देश में कथित तौर पर बढ़ते इन्टॉलरेंस के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को पॉर्लियामेंट से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकाला। मार्च पार्लियामेंट में गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ, जहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कई सीनियर कांग्रेसी लीडर शामिल हुए । कड़ी सुरक्षा में निकाले गए इस मार्च में शामिल कांग्रेसी नेताओं के हाथों में प्लेकार्ड थे। इन पर मोदी सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।

बता दें कि कांग्रेस ने नाथूराम गोडसे के महात्मा गांधी को गोली मारने वाली जगह से मार्च निकालने की परमीशन मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी थी। इसके बाद संसद भवन स्थित गांधी प्रतिमा से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने का फैसला लिया गया।
कांग्रेस का 11 मेंबर्स का डेलिगेशन राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा। इन नेताओं में सोनिया, राहुल के अलावा लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे। नेताओं ने राष्ट्रपति को एक मेमोरेंडम भी सौंपा। मेमोरेंडम में कहा गया कि देश में माहौल बिगाड़ने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। इससे पहले, सोनिया सोमवार को प्रेसिडेंट से मिली थीं। सोनिया गांधी ने उन्हें बताया था कि कांग्रेस के नेता एक मार्च निकालकर उनसे इसलिए मिलना चाहते हैं, क्योंकि कम्युनल फोर्सेज देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं।
कांग्रेस इन्टॉलरेंस के मुद्दे पर बेहद अटैकिंग रवैया अपनाने वाली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस मामले में मोदी सरकार को विंटर सेशन के दौरान घेरेगी। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इस तरह के मार्च निकालने से बिहार में 5 नवंबर को होने वाले लास्ट फेस के इलेक्शन में महागठबंधन को फायदा होगा। गौरतलब है कि लास्ट फेज में मुस्लिम बहुल इलाकों कटिहार, पूर्णियां, किशनगंज और अररिया में वोट डाले जाने हैं।















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