साल्वे ने कहा, कि ‘महाराष्ट्र सरकार द्वारा भेजे गए दस्तावेजों को उन्होंने खुद नहीं देखा है।’ इस पर अदालत ने कहा, कि वह दस्तावेजों को देखें और यदि वह उनमें कुछ संवेदनशील पाते हैं तो उसे अपने पास रख सकते हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘यदि उसमें कुछ नहीं है, तो कोई गोपनीयता नहीं होनी चाहिए। सामान्य तौर पर दस्तावेजों को साझा करने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।’ साल्वे ने कहा, कि ‘उनके पास एक अतिरिक्त प्रति है, जिसे वह याचिकाकर्ता के वकील पल्लव सिसोदिया को साझा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इसे अपने तक रखना होगा।’
न्यायाधीश लोया की मौत को लेकर विवाद पैदा हो गया है, क्योंकि लोया शोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसी मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आरोपी थे। शाह को बाद में आरोपमुक्त कर दिया गया था।



















