कोई गोपनीयता नहीं होनी चाहिए।’ बता दें, कि सामाजिक कार्यकर्ता टी.पूनावाला व मुंबई के पत्रकार बंधुराज संभाजी लोन ने न्यायाधीश लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
वकील हरीश साल्वे ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश होते हुए अदालत से मुहरबंद लिफाफे में मौजूद दस्तावेजों पर नजर डालने को कहा तो न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘याचिकाकर्ताओं के साथ इसकी प्रतियां साझा करें। हम मामले को सात दिनों के लिए स्थगित करते हैं।’



















