नई दिल्ली। विपक्ष के सांसदों ने राज्यसभा में सरकार पर आरोप लगाया है कि यूपी में बूचड़खाने बंद होने के बाद शेरों को मांस तक नसीब नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया है कि शेरों को अब मुर्गा खाकर अपना गुजारा करना पड़ रहा है।

slaughter house
राज्यसभा में यह आरोप लगाने वाले सांसदों का कहना था कि अवैध बूचड़खानों के खिलाफ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जो कार्रवाई की है इससे कई लोगों के रोजगार छिन गए हैं।
slaughter house
राज्य सभा में शून्य काल के दौरान ही तृणमूल कांग्रेस के सांसद नदीमुल हक ने मामला उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में हालत यह हो गई है कि अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर मांस बेचने और इसे तैयार करने वाले लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
नदीमुल हक ने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जिस तरह से ताबड़तोड़ बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है उससे रोजी-रोटी कमाने के लोगों के मूलभूत अधिकार पर ही सवालिया निशान लग गया है। हक ने कहा कि कौन आदमी क्या काम करता है और क्या खाता-पीता है, यह तय करना राज्य सरकार का अधिकार नहीं है।
slaughter house
उनका कहना था कि अगर राज्य सरकार को बूचडख़ानों के खिलाफ कार्रवाई करनी ही थी, तो इसका एक रोड मैप बनना चाहिए था ताकि इस काम में लगे लोग दूसरा रोजगार खोज सकें। नदीम उल हक ने कहा कि इंसानों की बात तो छोडि़ए उत्तर प्रदेश के चिडिय़ाघरों में शेर और बाघों को भी मुर्गे खा कर जिंदा रहना पड़ रहा है।
slaughter house
वह बोल ही रहे थे कि पीछे से आवाज आई कि मुर्गे क्या वहां तो शेरों को गाजर खाना पड़ रहा है। सरकार की तरफ से जवाब देते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने दो टूक कहा कि सिर्फ उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है जो गैरकानूनी तरीके से चल रहे थे। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी कत्लखानों को छोड़ा नहीं जाएगा और कानूनी तौर पर चल रहे बूचडख़ानों को छुआ नहीं जाएगा।


















