शाहरनामा ब्यूरो
साल 2000-01 में “मुंह नुचवा” उत्तर भारत की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गया था। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और आसपास के इलाकों में सैकड़ों लोगों ने रात में किसी रहस्यमयी हमलावर के देखे जाने या हमले का दावा किया।
हालांकि, पुलिस और प्रशासन को किसी संगठित हमलावर या रहस्यमयी जीव के ठोस सबूत नहीं मिले। मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों ने इसे बड़े पैमाने पर फैली अफवाह और सामूहिक भय (Mass Hysteria) का उदाहरण माना।
उनका कहना था कि लगातार फैलती चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के कारण लोगों में भय इतना बढ़ गया कि सामान्य घटनाओं को भी “मुंह नुचवा” से जोड़कर देखा जाने लगा।
फिर भी, उस दौर में यह रहस्य आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। आज भी ग्रामीण इलाकों में उस समय की कहानियां सुनने को मिल जाती हैं। यह घटना इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि अपुष्ट सूचनाएं और अफवाहें किस प्रकार पूरे समाज के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं।


















