दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) फ़्लाइट को हाईजैक करने या गिराने की नाकाम कोशिश के दौरान पायलट ने कंट्रोल टावर को इमरजेंसी कोड 7700 और 7500 भेजे, जिन्होंने सबका ध्यान खींचा है।
इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक, भेजा गया पहला कोड—स्क्वाक 7700 (Squawk 7700)—एक ऐसा सिग्नल है जिसे दुनिया भर में फ़्लाइट के दौरान इमरजेंसी का संकेत माना जाता है।
पायलट इस कोड का इस्तेमाल तब करते हैं जब विमान को किसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है, जैसे कि कोई तकनीकी खराबी, धुआं, ईंधन की समस्या या मेडिकल इमरजेंसी।
जब पायलट पास के एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर को यह कोड भेजता है, तो एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल विमान की इमरजेंसी लैंडिंग को प्राथमिकता देता है।
दूसरा कोड, स्क्वाक 7500 (Squawk 7500), गैर-कानूनी दखल, संभावित हाईजैकिंग या सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत देता है।
यह कोड पायलटों को रेडियो पर स्थिति बताए बिना एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को खतरे के बारे में चुपचाप अलर्ट करने की सुविधा देता है। एक और अहम कोड 7600 है, जो रेडियो कम्युनिकेशन के कट जाने का संकेत देता है।
फ्लाईदुबई की फ़्लाइट ने सऊदी अरब के शहर तबुक की ओर बढ़ने से पहले ये इमरजेंसी कोड भेजे थे। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सिविल एविएशन अधिकारी इस घटना के ऑपरेशनल और सुरक्षा पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि घटना की पक्की वजह का पता सिर्फ़ कोड या फ़्लाइट-ट्रैकिंग ऐप्स पर दिखने वाले फ़्लाइट पाथ से नहीं लगाया जा सकता।
असली हालात का पता लगाने के लिए ब्लैक बॉक्स, एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल रिकॉर्ड, रेडियो कम्युनिकेशन और दूसरे सबूतों की जांच करनी होगी।

















