अली ताहिर रिज़वी
‘बुजुर्गों की विरासत पर अभी तक नाज करता हूं, जमीं का साथ देने के लिए परवाज करता हूं, सियासत जंग है इस दौर में जम्हूरियत वालों, मुरादाबाद से इस जंग का आगाज करता हूं। इस शेर के साथ मुशायरों में तहलका मचाने वाले इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी राजनीतिक पारी के आगाज का ऐलान किया।

मुरादाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने इस शेर के साथ मुरादाबाद से कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जाने वाली सूची ट्वीट की। केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर अपनी बेबाक शायरी के जरिए लगातार सवाल उठाने वाले शायर इमरान प्रतापगढ़ी को मुरादाबाद से चुनावी रण में उतार कांग्रेस ने उन्हें मोदी विरोध का इनाम दिया है। इससे पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर मुरादाबाद से चुनाव मैदान में थे, लेकिन राजबब्बर की मंशा के बाद पार्टी ने राजबब्बर की सीट बदलते हुए उन्हें मुरादाबाद के स्थान पर फतेहपुर सीकरी और मुरादाबाद सीट से इमरान प्रतापगढ़ी को चुनावी वैतरणी पार करने की जिम्मेदारी दी है।
सियासत जंग है इस दौर में जम्हूरियत वालों, मुरादाबाद से इस जंग का आगाज करता हूं
बेबाक शायरी से दिल जीतने वाले इमरान को मिला इनाम
राजबब्बर की जगह कांग्रेस ने दिया मुरादाबाद से टिकट
मुशायरों की दुनिया के बाद अब राजनीति में आजमाएंगे हाथ
शेर के साथ किया अपने राजनीतिक सफर का आगाज
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 6 अगस्त 1987 को जन्मे 31 वर्षीय इमरान ने अपनी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की। अप्रैल 2008 से इमरान ने मुशायरों की दुनिया में कदम रखा। हिन्दी और उर्दू में शायरी करने वाले इमरान ने अपनी बेबाक शायरी की बदौलत बहुत कम समय में लोकप्रियता हासिल की। वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान से सम्मानित किया।
जेएनयू छात्र नजीब अहमद के अक्टूबर 2016 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ झगड़े के बाद से लापता होने के बाद नजीब पर इमरान की लिखी नज्म ने उन्हें रातों-रात बुलंदियों की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अपनी शायरी के जरिए सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना कर इमरान ने मुशायरों में जबरदस्त वाह-वाही लूटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद को चौकीदार बताने और उसके बाद विजय माल्या के विदेश जाने पर उन्होंने अपनी शायरी के जरिए प्रधानमंत्री पर तंज किया। मुशायरों में उनकी नज्म ‘वाह रे देश के चौकीदार भी खूब चर्चित हुई।
मुशायरों के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री पर भाजपा शासनकाल में सीमा पर शहीद सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा पर सैनिक शहीद हो रहे हैं और प्रधानमंत्री लगातार विदेश में दौरों पर रहते हैं। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है के जवाब में प्रधानमंत्री सहित पूरे मंत्रिमंडल और भाजपा नेताओं के अपने नाम के आगे चौकीदार लगाने के बाद उन्होंने संतकबीर नगर से भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी के चौकीदार शरद त्रिपाठी की प्रोफाइल को ट्वीट किया। शरद त्रिपाठी बीते दिनों अपनी ही पार्टी के विधायक राकेश सिंह को बैठक में जूतों से मार कर चर्चा में आए थे।
ट्वीटर पर साढ़े तीन लाख और इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोअर रखने वाले इमरान ट्विटर पर नजीब की मां नफीस फातिमा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांाधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा मुखिया अखिलेश यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, शायर कुमार विश्वास, लता हया सहित कुल 75 लोगों को फॉलो कर रहे हैं। अपनी शायरी और सोशल मीडिया पर लगातार सरकार की नीतियों का विरोध और कांग्रेस के समर्थन के इनाम स्वरूप कांगे्रस ने उन्हें मुरादाबाद सीट से उम्मीदवार बना कर दांव लगाया है। पूर्व में भी कांग्रेस शायर, खिलाडिय़ों, बुद्धिजीवियों को राजनीति के मैदान में उतार चुकी है।
पिता चाहते थे डाक्टर बनें इमरान
इमरान के पिता मोहम्मद इलियास खान यूनानी चिकित्सक हैं। 10 भाई-बहनों में दूसरे नम्बर पर इमरान के लिए उनके पिता की इच्छा चिकित्सक बन कर गरीबों की सेवा करने की थी, लेकिन इमरान को शुरू से ही साहित्य में रुचि थी। इमरान ने स्कूल में विज्ञान विषय के साथ पढ़ाई की, लेकिन साहित्य में रुचि होने के चलते उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में अपनी मास्टर्स डिग्री हासिल की।
पढ़ाई के दौरान ही वे हिन्दी में कविताएं लिखने लगे और कवि सम्मेलनों में शामिल होने लगे। वर्ष 2008 में ‘मदरसाÓ पर लिखी नज्म उन्होंने 2010 में मुम्बई में एक मुशायरे में पढ़ी, जिसके बाद उनकी नज्म को बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसने रातों-रात इमरान को प्रसिद्ध बना दिया। इमरान अब तक 100 से अधिक नज्म लिख चुके हैं, जिसमें फिलीस्तीन, नजीब और मॉब लिंचिंग का शिकार हुए लोगों पर लिखी नज्म ने उन्हें सफलता की सीढ़ी तक पहुंचाया। उन्होंने मॉब लिंचिंग के शिकार हुए लोगों के पीडि़त परिवारों की आर्थिक मदद भी की।



















