कश्मीर में पत्थरबाजी बिजनेस बन गई है, जिसे लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। केंद्र सरकार इस पर लगाम लगाने की स्ट्रैटजी तैयार कर रही है।
– गुरुवार को फारूख बैसाखी पर एक प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे थे। वहां जर्नलिस्ट्स ने पत्थरबाजों को उनके सपोर्ट और चुनाव में वोट हासिल करने के लिए नरम अलगाववाद के उनके प्रचार पर सवाल किए।
पूर्व सीएम फारूख से जब कहा गया कि क्या वे पत्थरबाजों का सपोर्ट करके देश के सेंटिमेंट्स (संवेदनाओं) से खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “देश के सेंटिमेंट्स से आपका क्या मतलब है? आपको को यह देखना होगा कि क्या लड़कों की कुछ शिकायतें हैं? क्या आपको नहीं लगता कि उन्हें कुछ शिकायतें हैं? आप सिर्फ देश के बारे में सोचते हैं, क्या देश को उनकी (पत्थरबाजों) और उनके भविष्य की चिंता है?”



















