केजीएमयू (KGMU) परिसर में स्थित मजारों को हटाने के नोटिस दिए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। हाल ही में, बाबर अशरफ और पीरजादा नासिर अली मिनाई ने केजीएमयू की कुलपति (VC) प्रो. सोनिया नित्यानंद और प्रवक्ता डॉ. के. के. सिंह के खिलाफ चौक कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है।
इस मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
विवाद का कारण: केजीएमयू प्रशासन ने परिसर में स्थित लगभग 6 मजारों को “अवैध अतिक्रमण” बताते हुए उन्हें हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी किया था। प्रशासन का तर्क है कि इनसे अस्पताल परिसर में आवाजाही बाधित होती है और इनके पास कोई कानूनी अनुमति नहीं है।
शिकायतकर्ताओं का पक्ष: मजारों से जुड़े पक्षकारों और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि ये मजारें लगभग 600 साल पुरानी हैं। उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई को धार्मिक आस्था पर चोट बताया है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस को तहरीर: बाबर अशरफ ने इस मुद्दे पर औपचारिक कानूनी बैठक की और कुलपति व अन्य अधिकारियों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में पुलिस को तहरीर दी।
यह मामला लखनऊ के चौक कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आता है और वर्तमान में प्रशासन तथा स्थानीय संगठनों के बीच तनाव का विषय बना हुआ है।
केजीएमयू मज़ार विवाद में तहरीर दिए जाने के बाद की ताजा स्थिति और प्रशासन के कदम इस प्रकार हैं:
प्रशासनिक समय सीमा: केजीएमयू प्रशासन ने मज़ार कमेटियों को अपना पक्ष रखने के लिए 28 फरवरी 2026 तक का अंतिम समय दिया है। प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह के अनुसार, यदि इस तारीख तक कोई ठोस कानूनी दस्तावेज या मालिकाना हक का प्रमाण पेश नहीं किया गया, तो प्रशासन अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
पुलिस की भूमिका: तहरीर मिलने के बाद चौक पुलिस इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कानूनी राय ले रही है। फिलहाल किसी भी पक्ष के खिलाफ कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
स्पष्टीकरण: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शाहमीना शाह और हजरत हाजी हरमैन शाह की ऐतिहासिक मज़ारों को हटाने का कोई नोटिस नहीं दिया गया है। नोटिस केवल उन 5-6 संरचनाओं को दिया गया है जिन्हें प्रशासन “अवैध अतिक्रमण” मान रहा है।
विरोध प्रदर्शन: ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के बाबर अशरफ और अन्य मुस्लिम संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 600 साल पुरानी इन ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुँचाया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की भी मांग की है।




















