पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है. और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
ये चंद्र ग्रहण उत्तरी अमरीका को छोड़ कर पृथ्वी के अधिकांश भाग में दिखा लेकिन पूर्ण चंद्र ग्रहण यूरोप के अधिकांश भागों, मध्यपूर्व, मध्य एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा गया.
भारत में इस दुर्लभ आकाशीय घटना को दिल्ली, पुणे, बेंगलुरू और मुंबई समेत देश के सभी शहरों में देखा गया. कई चैनलों और वेबसाइट पर चंद्र ग्रहण की सीधी तस्वीरें दिखाई गईं.
चंद्र ग्रहण के दौरान चांद पृथ्वी से अपनी सर्वाधिक दूरी पर रहा. इस घटना को अपोगी कहते हैं जिसमें पृथ्वी से चांद की अधिकतम दूरी 4,06,700 किलोमीटर होती है.
















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