लखनऊ, 30जून.
देर रात मे महिलाओं ने मौलाना कल्बे जवाद की अपील पर छोटे इमामबाड़े का फाटक खोल तो दिया मगर उन्होने धमकी दी है के अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गयी तो वह किसी भी वक़्त दुबारा टला दाल सकती हैं.
तीन दिन पहले बड़े इमामबाड़े का ताला खुलवाने में प्रशासन को तो कामयाबी मिल गई लेकिन उसके विपरीत छोटे इमामबाड़े का ताला खुलवाना प्रशासन के लिए गले हड्डी बन गया है. आज इलाहबाद की हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रशासन से अब तक की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी गई थी जिस पर अदालत ने जिलाधिकारी लखनऊ पुछा कि अभी तक छोटे इमामबाड़े का ताला क्यों नहीं खुला और हालात ख़राब थे तो धारा 144 क्यों नहीं लगाई गई. अदालत अब छोटे इमामबाड़े पर अपनी अगली सुनवाई कल करेगा और जिलधिकारी से हलफनामा माँगा गया है.
वहीँ हाईकोर्ट के फैसले के सम्बन्ध में मौलाना कल्बे जवाद आज शाम 4 बजे अपने आवास पर धर्मगुरूओं, वकीलों और छोटे इमामबाड़े पर भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं के साथ बैठक करेंगे और आज कोर्ट के फैसले का जवाब दाखिल करने, छोटे इमामबाड़े पर ताला खोलने और आगे रणनीत पर बातचीत करेंगे.
प्रशासन को लगी आज अदालती फटकर के बाद अब प्रशासन के पास आज दिन भर का और समय है अब प्रशासन आज एक बार फिर छोटे इमामबाड़े का ताला खुलवाने के लिए हर सम्भव कोशिश करेगा. देखना यह होगा कि प्रशासन प्रदर्शन कर रही महिलाओं से बातचीत करके मामले का हल निकलेगा या फिर धारा 144 लगाकर कानूनी कार्रवाई करके ताला खुलवाएगा.
प्रशासन ने कल दोपहर 2:20 तक का समय देने के बाद भारी संख्या में अर्द्धसैनिक बलों और महिला पुलिस फ़ोर्स के साथ इमामबाड़े का ताला खोलने के लिए कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की गई थी. लेकिन ताला न खोलने पर अड़ी महिलाओं ने भी मोर्चा सम्भालते हुए मशाल, मिट्टी का तेल और हाथ में माचिस लेकर आत्मदाह की चेतावनी दे दी थी. जिसको देखते हुए प्रशासन ने मौलाना कल्बे जवाद से बात की और मौलाना कल्बे जवाद ने प्रशासन को शाम 6:00 बजे तक कोई भी कार्रवाई न करने की बात कही थी जिसको प्रशासन ने मानते हुए पुलिस फ़ोर्स को हटा लिया था.
मौलाना के दिए हुए समय का प्रशासन ने इन्तेजार इस उम्मीद से किया था कि मौलाना शाम को आएंगे और महिलाओं से बातचीत के बाद छोटे इमामबाड़े का भी ताला खुलवा देंगे लेकिन शाम में बारिश तेज हो जाने की वजह से मौलाना रोजा अफ्तारी करने के बाद आने की बात कही और भारी संख्या में मौजूद समर्थकों की भीड़ भी हट गयी थी. रोजा अफ्तारी के थोड़ी देर बाद फिर धीरे-धीरे भीड़ जमा हो गई थी और मौलाना कल्बे जवाद के आने से पहले भारी संख्या में लोग जुट गये थे.
मौलाना कल्बे जवाद देर रात छोटे इमामबाड़े पहुचे और कहा कि महिलाओं ने अपनी मर्जी से भूख हड़ताल शुरू की है और बिना उनकी मर्जी से हम कुछ नहीं कर सकते हैं. लेकिन मौलाना ने प्रशासन को यह नसीहत भी दी कि प्रदर्शन कर रही महिलाओं को अगर जबरदस्ती ताकत के बल पर हटाने की कोशिश की गई तो उसके बाद अगर शहर का माहोल इस रमजान के पवित्र महीने में खराब हुआ तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. यह कौम की इज्ज़तदार महिलाएं हैं इनके साथ प्रशासन पूरे सम्मान के साथ पेश आये.
मौलाना ने प्रशासन से सवाल किया था कि जब यहाँ पर महिलाएं प्रदर्शन कर रहीं है तो आखिर पूरे इलाके को छावनी बनाने की जरूरत क्या थी. या फिर डराने की कोशिश की जा रही है.
मौलाना कल्बे जवाद की प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल से फोन पर बात हुई थी और उनसे मौलाना ने कहा था कि आपने हमसे सहयोग माँगा था और हमने आपको सहयोग दिया लेकिन छोटे इमामबाड़े पर तहरीक की शुरूआत करने वाली महिलाओं की बिना उनकी मर्जी के ताला खुलवाना सम्भव नहीं लिहाज़ा सोमवार को कोर्ट से फैसला आना है जिसके सम्बंध में हमारी तरफ से भी याचिका दायर की गई है.
मौलाना ने कहा था कि कोर्ट से फैसला आने के बाद हम उसका अध्ययन करेंगे और यह देखेंगे कि अदालत ने उसे धर्म स्थल के रूप में स्वीकार किया है या फिर अदालत अभी भी उसे पब्लिक प्लेस ही मान रही है. अदालत का फैसला देखने के बाद हम भी कानून के जानकारों से राय मशविरा करेंगे और उसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे. मौलाना ने पुलिस और प्रशासन दोनों को चेतावनी दी थी कि छोटे इमामबाड़े पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही महिलाओं को जोर जबरदस्ती से हटाने की कोशिश न करें. वरना अगर पवित्र रमजान में माहोल बिगड़ा तो उसकी जिम्मेदारी जिला और पुलिस प्रशसान दोनों की होगी.


























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