न्यूयॉर्क: यदि आप बहुत अधिक एंटीबायोटिक्स दवाओं का उपयोग करते हैं तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि मधुमेह जैसे मूक हत्यारा आप अपना शिकार बना सकता है।
यह चौंका देने वाला दावा एक नई चिकित्सा अनुसंधान में सामने आया है।
जर्नल ऑफ चिकित्सीय ाैंडर्करीनोलोजी एंड मीटाबोलज़ में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि इस बात के सबूत मिले हैं कि मधुमेह और डॉक्टरों की सिफारिश की दवाओं के बीच स्पष्ट संबंध मौजूद है।
शोध में बताया गया है कि पिछले 15 साल के दौरान 5 बार एंटीबायोटिक्स दवाओं का उपयोग मधुमेह टाइप टू पीड़ित होने की संभावना 53 फीसदी तक बढ़ा सकता है।
शोध में यह बात भी सामने आई है कि बैक्टरिया या वायरस को अधिक प्रभावी एंटीबायोटिक्स दवाओं का उपयोग मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
शोधकर्ता डॉक्टर क्रिस्टीन मीककलसन के अनुसार अनुसंधान में पाया गया है कि पिछले 15 साल के दौरान अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों में मधुमेह टाइप टू का रोग अधिक पाया गया।
डेनमार्क से संबंध रखने वाले शोधकर्ता का कहना था कि इस बारे में अधिक अनुसंधान की जरूरत है क्योंकि अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती कि यह दवा मधुमेह बढ़ाने का कारण बनती हैं।
गौरतलब है कि पिछले 60 वर्षों के दौरान एंटीबायोटिक्स दवाओं विभिन्न संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
शोधकर्ताओं के अनुसार हालांकि हम पूरे विश्वास से तो नहीं कह सकते, लेकिन अनुसंधान के परिणाम में यह संभावना सामने आए हैं कि एंटीबायोटिक्स से मधुमेह टाइप टू का खतरा बढ़ता है जोकि इस समय वैश्विक महानतम चुनौती है।
उनका कहना था कि इस संबंध में चीनी मीटाबोलज़म पर इन दवाओं के दीर्घकालिक प्रभाव की समीक्षा कर ही निश्चित रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
















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