वॉशिंगटन: जंगल की आग के धुएं में सांस लेने से फेफड़े, कोलन, स्तन, मूत्राशय और रक्त कैंसर का खतरा काफी बढ़ सकता है। न्यू मैक्सिको यूनिवर्सिटी के कॉम्प्रिहेंसिव सेंटर के मुख्य लेखक शेंडियन वू के अनुसार, हालांकि यह पहले से ही पता है कि जंगल की आग के धुएं में कई तरह के जहरीले पदार्थ होते हैं।
इनमें कैंसर पैदा करने वाले यौगिक भी शामिल हैं। फिर भी, असल ज़िंदगी की स्थितियों में इस धुएं का पूरे शरीर पर क्या असर होता है, यह अभी पूरी तरह से समझा नहीं गया है, खासकर कैंसर की संभावना के मामले में। शेंडियन वू के अनुसार, इस धुएं में मौजूद जहरीले तत्व सिर्फ़ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल सकते हैं।
इस तरह, वे शरीर के अलग-अलग जैविक तंत्रों पर असर डालते हैं और कैंसर बनने की प्रक्रिया को तेज़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी साफ़ किया कि धुएं के संपर्क में आने से शरीर में सूजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे पूरे शरीर पर असर पड़ सकता है और कैंसर का खतरा और भी बढ़ सकता है।












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