मुहम्मद और उसके साथियों की कठिन मेहनत से बनने वाले स्कूल में 200 बच्चे शिक्षा के लिए आने लगे। स्कूल में बच्चों के साथ ही अधेड़ उम्र और बूढ़े लोगों को भी जो साक्षर नहीं हैं शिक्षा दी जाने लगी।
इससे पहले ब्रिटेन की मार्लबर्ग युनिवर्सिटी भी एक सीरियाई युवा अहमद रशीद को शिक्षा के क्षेत्र में सघन प्रयास के लिए पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है।


















