मुहम्मद अलजुन्दी बताते हैं कि वह लेबनान में शरणार्थी शिविर में थे और भविष्य के बारे में चिंतित रहते थे लेकिन फिर उन्हें यह ख़याल आया कि भविष्य तो अस्पष्ट है और उस पर किसी का बस भी नहीं है तो चिंता छोड़कर वह किया जाए जो इस समय करना हमारे बस में है।
विनाशकारी युद्ध के कारण सीरिया से लेबनान पलायन करने पर जब मुहम्मद और उनके परिवार को मजबूर होना पड़ा तो मुहम्मद अलजुन्दी काफ़ी छोटे थे मगर वह हार नहीं माने बल्कि उन्होंने बेक़ाअ में स्कूल स्थापित कर दिया। उनके रिश्तेदारों तथा कुछ कल्याणकारियों ने उनकी मदद की ओर उन्होंने बच्चों को अंग्रेज़ी भाषा और गणित के साथ ही फ़ोटोग्राफ़ी भी सिखाई।




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