सेंट्रल रेलवे डीसीपी समाधान पवार ने जानकारी दी कि हादसा 10 दिसंबर शाम करीब 7- 7.30 का है, जब अरुणा यादव और उनके पति दिनेश यादव, अरुणा के रेगुलर चेकअप के लिए सीएसटी में मौजूद कामा हॉस्पिटल से लौट रहे थे. शाम की भीड़ को देखते हुए अरुणा और उनके पति ने विकलांग डिब्बे में बैठने का सोचा.
जैसे ही लोकल कुर्ला स्टेशन पहुंची वहां कुछ लोग चढ़े और गर्भवती अरुणा को अपनी सीट पर बैठे देखा. यहीं से झगड़े की शुरुआत हुई और भीड़ में से कुछ लोग इन दोनों को उठने के लिए कहने लगे. एक दो लोग तो इन पर चिल्लाने भी लगे. मामला बढ़ता देख कुछ लोगो ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन इस सब से बात नहीं बनी और दिनेश और अरुणा को लोकल ट्रेन से उतार दिया.














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