मुंबई में रमज़ान के आग़ाज़ के साथ ही शहर का मिज़ाज बदल जाता है। सहरी की ख़ामोशी से लेकर इफ्तार की रौनक़ तक, हर गली-कूचे में इबादत और इंसानियत का रंग गाढ़ा दिखता है। मस्जिदें रोशनी से नहाई रह... Read more
लखनऊ में रमज़ान के चाँद के साथ ही शहर की फ़िज़ा बदल जाती है। सुबह सहरी की ख़ामोशी और शाम इफ्तार की गहमागहमी—दोनों मिलकर अवध की तहज़ीब को नई रौशनी दे देते हैं। पुराने लखनऊ से लेकर नए इलाक़ों... Read more
रमज़ान के आने पर, ब्रिटिश किंग चार्ल्स III ने दुनिया भर के मुसलमानों को इस मुबारक महीने की बधाई दी। रॉयल फ़ैमिली के ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से कल (17 फरवरी) फ़ोटो और वीडियो शेयरिंग प्लेट... Read more
लखनऊ।यह शहर अपने कबाब, तहज़ीब और नफ़ासत के लिए जितना मशहूर है, उतना ही अपनी अनकही गालियों के लिए भी। यहाँ गाली दी नहीं जाती, अदा की जाती है। आवाज़ में मिठास, चेहरे पर मुस्कान और शब्दों में ऐ... Read more
विंटेज कारें सिर्फ़ सवारी नहीं होतीं, वे अपने दौर की तकनीक, शानो-शौकत और सामाजिक हैसियत का बयान होती हैं। मोटे स्टील के ढांचे, हाथ से बने पार्ट्स, लकड़ी और चमड़े का इस्तेमाल—इन कारों को आज भ... Read more
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में स्ट्रेस कम करने के देसी और साइंटिफिक तरीके बिज़ी ज़िंदगी में मन की शांति कैसे बनाए रखें? तेज़ रफ़्तार लाइफस्टाइल, पैसे का दबाव, परिवार की ज़िम्मेदारियां और लगातार स्... Read more
उन्नीसवीं सदी का विक्टोरियन दौर फर्नीचर के इतिहास में भव्यता, गहराई और बारीक कारीगरी का प्रतीक माना जाता है। यह वह समय थां, जब घरों की सजावट सिर्फ़ ज़रूरत नहीं बल्कि सामाजिक हैसियत, रुचि और... Read more
भारतीय सिनेमा की कहानी जब भी लिखी जाएगी, उसकी पहली पंक्ति में दादा साहब फाल्के का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। जिस दौर में भारत में सिनेमा एक अनजाना सपना था, उस समय धुंडिराज गोविंद फाल्... Read more
Imambara of Raja Jhau Lal (जिसे बैतुल माल भी कहा जाता है) लखनऊ के पुराने ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक है, जो खास तौर पर मोहल्ला ठकुरगंज में स्थित है। यह इमामबाड़ा शिया समुदाय के लिए एक... Read more














