ममता ने कहा, मैं यहां किसी की दया पर नहीं हूं। उन्होंने जिस तरीके से मुझसे बातचीत की, एक बार तो मैंने ‘कुर्सी’ छोड़ने की सोची। त्रिपाठी ने ममता के रूख और भाषा पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि हमारी बातचीत में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे ममता बनर्जी को लगे कि उनकी बेइज्जती हुई या उन्हें धमकाया गया या उन्हें अपमानित किया गया।
















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