दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति ऐसा है जो तीन वरिष्ठ सुन्नी धर्मगुरुओं को सऊदी अरब में फांसी के फंदे से बचा सकता है | लेकिन किया ये मुमकिन है जो वह शख्स इन तीन सुन्नी धर्मगुरुओं की फांसी रुकवाने में दिलचस्पी रखता हो |
सितम्बर 2017 में सऊदी अरब में जब तीन वरिष्ठ सुन्नी धर्मगुरुओं एवं विद्वानों सलमान अल-ओदाह, अवद अल-क़रनी और अली अल-ओमरी को गिरफ़्तार किया गया था, तो दुनिया और इस्लमी जगत में कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं जताई गई थी।

उसके एक महीन के बाद ही सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने घोषणा की थी कि वह सऊदी अरब को उदारवादी इस्लाम की ओर वापस लौटाना चाहते हैं, उन्होंने विश्व समुदाय से अनुरोध किया कि एक कट्टरपंथी देश को एक खुले समाज में बदलने के लिए वह उनसे सहयोग करे।
बिन सलमान की इस घोषणा के बाद, सरकार के आलोचक धर्मगुरुओं और कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारी का एक नया दौर शुरू हो गया और उसी साल नवम्बर में फ़ाइव स्टार होटल रिट्ज़ कार्लटॉन को एक बड़ी जेल में बदल दिया गया।
जून 2018 में जब महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी गई तो साथ ही महिला अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाली दर्जनों महिला कार्यकर्ताओं को जेल की काल कोठरियों में डाल दिया गया जो आज भी सलाख़ों के पीछे हैं।
अक्तूबर 2018 में बिन सलमान के एक विशेष हत्यारे दल ने सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसूलेट में हत्या कर दी और शव के टुकड़े टुकड़े कर दिए।
वरिष्ठ सुन्नी धर्मगुरु सलमान अल-ओदाह की गिरफ़्तारी के एक साल बाद उनके ख़िलाफ़ आतंकवाद के 37 मामलों में मुक़दमा दायर किया गया।

ख़ाशुक़जी ने इन आरोपों को हास्यास्पद बताते हुए कहा था कि सऊदी शासन को इन हास्यास्पद आरोपों के बारे में दुनिया को स्पष्टीकरण देना होगा।
इन समस्त घटनाक्रमों को देखते हुए निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि मोहम्मद बिन सलमान जिस नए दौर में सऊदी अरब को ले जाने की बात कर रहे हैं, उसमें किसी भी प्रकार के उनके विरोधी के लिए कोई स्थान नहीं है और सरकार के आलोचकों या मूल अधिकारों की मांग करने वालों को पहले से भी अधिक बर्बरता से कुचला जाएगा।
जून 2017 में क्राऊन प्रिंस बनने के बाद से बिन सलमान ने सऊदी अरब में न केवल उदारवादी इस्लाम को स्थापित करने के लिए कोई काम किया है, बल्कि ग़ैर वहाबी विचारधारा के सुन्नी धर्मगुरुओं और शिया मुसलमानों की आवाज़ को पहले से कहीं अधिक ताक़त से दबाने का काम किया है और ख़ुद को एक तानाशाह के रूप में पेश किया है।
इसी प्रक्रिया के चलते सऊदी शासन रमज़ान के बाद इन तीन वरिष्ठ सुन्नी धर्मगुरुओं का सिर क़लम करने जा रहा है।
इनका गुनाह सिर्फ़ यह है कि सऊदी समाज में प्रभावशाली होने के कारण, बिन सलमान इन्हें अपने रास्ते की एक बड़ी रुकावट समझते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता करोड़ों फ़ोलोवर्स के रूप में बिन सलमान की तानाशाही के लिए ख़तरा बन सकती है।
अब यहां सवाल यह है कि कौन है जो इन तीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं को फांसी पर चढ़ने से बचा सकता है?
सऊदी शासन पूर्ण रूप से बिन सलमान के निंयत्रण में है, इसलिए उनके पिता किंग सलमान, या उनके सलाहकार या शाही परिवार के अन्य राजकुमार कोई भी ऐसी स्थिति में नहीं है कि जो इन फांसियों को रोक सके।
सऊदी जनता भी टीवी पर इन लोगों के सिर क़लम होते हुए देखने के अलावा कुछ नहीं कर सकती है। यूरोप में कोई ऐसा प्रभावशाली नेता नहीं है, जो इन तीन लोगों को फांसी पर चढ़ने से रोक सके।
हां, इस दुनिया में इस वक़्त केवल एक व्यक्ति ऐसा है, जो बिन सलमान को ऐसा करने से रोक सकता है, वह हैं अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प।


















