इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, अमरीका पर तनिक भी विश्वास नहीं रखता और परमाणु समझौते की परिधि में अमरीका के साथ पहली वार्ता के कटु अनुभव को कभी नहीं दोहराएगा क्योंकि कोई भी स्वतंत्र और बुद्धिमान राष्ट्र दबाव में वार्ता स्वीकार नहीं करता।
गुरुवार की सुबह जापान के प्रधानमंत्री शेन्ज़ो आबे ने वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की। मुलाक़ात के शुरु में ही जापान के प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेता से कहा कि मैं श्रीमान की सेवा में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का संदेश पहुंचाना चाहता हूं। इस पर वरिष्ठ नेता ने जापान के प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे आपकी सद्भावना और गंभीरता पर कोई संदेह नहीं है किन्तु उस चीज़ के बारे में जो आपने अमरीकी राष्ट्रपति के बारे में कहा है, मैं ट्रम्प जैसे व्यक्ति को किसी भी प्रकार के संदेशों की आवाजाही के योग्य नहीं समझता और न मुझे उनका कोई उत्तर देना है और न ही मैं उनसे कुछ कहूंगा।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने जापान के प्रधानमंत्री की इस बात की ओर संकेत करते हुए जिसमें उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने मुझसे कहा कि अमरीका, ईरान में प्रशासन बदलने का इरादा नहीं रखता, बल देकर कहा कि अमरीकियों के साथ हमारी समस्या, सरकार का परिवर्तन नहीं है क्योंकि यदि उन्होंने ऐसा किया भी है तो उसको लागू नहीं कर सकते और जैसा कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपतियों ने पिछले चालीस वर्षों के दौरान ईरान को तबाह करने का प्रयास किया किन्तु नहीं कर सके।
वरिष्ठ नेता ने ईरान द्वारा परमाणु हथियारों के निर्माण को रोकने के लिए अमरीका के इरादे पर आधारित जापान के प्रधानमंत्री के बयान की ओर संकेत करते हुए कहा कि हम परमाणु हथियारों के विरोधी हैं, परमाणु हथियारों के वर्जित होने पर आधारित मेरा फ़त्वा भी है किन्तु यह भी जान लें कि यदि हम परमाणु हथियारों के निर्माण का इरादा कर लें तो अमरीका हमारा कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता और अमरीका का अनुमति न देना, कोई रुकावट नहीं पैदा कर सकता।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने परमाणु समझौते की परिधि में अमरीका के साथ वार्ता प्रक्रिया के बारे में कहा कि परमाणु समझौते के बाद, सबसे पहले और तुरंत जिसने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया, वह ओबामा थे, यह वही थे जिन्होंने ईरान से वार्ता की इच्छा व्यक्त की थी और मध्यस्थ भी भेजा था।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने जापान के प्रधानमंत्री के इस बयान की ओर जिसमें उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने उनसे कहा कि अमरीका से वार्ता ईरान की प्रगति का कारण बनेगा, कहा हम ईश्वर की कृपा से, अमरीका से वार्ता बिना और प्रतिबंधों के बावजूद प्रगति करेंगे।
वरिष्ठ नेता ने ईरान के साथ संबंधों में विस्तार के लिए जापानी प्रधानमंत्री के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि जापान, एशिया का महत्वपूर्ण देश है और अगर वह ईरान से संबंधों में विस्तार में रुचि रखता है तो उसे अपना ठोस इरादा दिखाना चाहिए, जैसा कि कुछ महत्वपूर्ण देशों ने यह इरादा दिखाया है।
जापान के प्रधानमंत्री शेन्ज़ो आबे ने इस मुलाक़ात में तेहरान दौरे के दौरान अपनी मुलाक़ातों की ओर संकेत करते हुए आशा व्यक्त की है कि इन वार्ताओं से अधिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।

















