हेलवी का कहना था कि मध्यपूर्व में अमरीका की रणनीति बहुत कठिन दौर से गुज़र रही है। इस समय रूस मध्यपूर्व में अधिक सक्रिय है। इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने वर्ष 1996 में रूसी सरकार से कह दिया था कि मध्यपूर्व की शांति प्रक्रिया से रूस का अलग रहना एक बड़ी ग़लती है।
दूसरी ओर इंटेलीजेन्स मामलों के विशेषज्ञ यूसी मीलमान ने मआरीव अख़बार में एक लेख में लिखा है कि इस्राईल और सऊदी अरब के संबंधों में बदलाव की शुरुआत 1980 के दशक में उस समय शुरू हुई जब सऊदी अरब ने फ़िलिस्तीन इस्राईल विवाद को हल करवाने के लिए पहल की। उन्होंने आगे लिखा कि पूर्व सऊदी इंटैलीजेन्स प्रमुख बंदर बिन सुलतान सऊदी अरब इस्राईल संबंधों के मूल योजनाकार थे।
विशेषज्ञ का मानना है कि बंदर बिन सुलतान ने सऊदी शाही ख़ानदान के भीतर इस्राईल से संबंध स्थापित करने के लिए वातावरण तैयार किया क्योंकि उनका मानना है कि ईरान का मुक़ाबला करने के लिए इस्राईल की मदद लेना ज़रूरी है। बंदर बिन सुलतान ने वर्ष 2007 में इस्राईली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट से मुलाक़ात की थी जबकि मोसाद के पूर्व निदेशक मेयर डागान सऊदी अधिकारियों से मिले थे।



















