सऊदी मुफ्ती शेख जमआन अज़्ज़ब ने फतवा दिया है कि इस साल, क़तरी नागरिकों के रमज़ान के रोज़ों को अल्लाह कूबूल नहीं करेगा क्योंकि वह ” ईश्वरीय शासक ” की आज्ञापालन से बाहर निकल गये।

इस मुफ्ती ने कहा कि क़तर के लोगों का रोज़ा खराब रहेगा जब तक कि वह सऊदी अरब से माफी नहीं मांगते और सऊदी अरब इस माफी को स्वीकार नहीं करता।
सऊदी मुफ्ती शेख जमआन अज़्ज़ब ने यह फतवा उस समय दिया जब उन्हें विश्व प्रसिद्ध विश्व विद्यालय अलअज़हर में क़तर के मामले पर विचार के लिए बुलाया गया था।
मुफ्ती शेख जमआन अज़्ज़ब इसी पर नहीं रुके उन्होंने कहा कि सऊदी अरब का विरोध, महिलाओं की माहवारी और बच्चे पैदा करने जैसा है कि जिसके दौरान रोज़ा सही नहीं होता।
मुफ्ती शेख जमआन अज़्ज़ब ने क़तर से मांग की है कि वह दूसरों के अंजाम से सबक़ हासिल करे। उन्होंने कहाः
” सद्दाम (सऊदी अरब की आज्ञापालन के) अपने रास्ते से हटने पर अड़ गये तो उन पर अमरीकी सैनिक विजयी हुए और उन्होंने इराक को तबाह कर दिया और “काफिरों” का यही अंजाम होता है।”
मुफ्ती शेख जमआन अज़्ज़ब ने क़तर से कहा कि वह सऊदी अरब से माफी मांगे क्योंकि ” सऊदियों की कृपा, बहुत व्यापक है और निश्चित रूप से वह क़तर का पाप माफ कर देंगे अगर क़तर फिर से सऊदी अरब का विश्वास जीतने में सफल होता है और उन आतंकवादी संगठनों से दूरी बनाएगा जिनका वह बिना अनुमति के समर्थन करता रहा है अन्यथा उसे सऊदी अरब के आक्रोश और अभिशाप का सामना करना पड़ेगा और यह उसके लिए बहुत कड़ा प्रकोप होगा।”
याद रहे वहाबी मुफ्तियों की ओर से सऊदी सरकार के हित में फतवे आम बात है किंतु इस प्रकार से नमाज़ और रोज़े को राजनीतिक मामलों से जोड़ने वाले इस प्रकार के फतवे का उदाहरण कम मिलता है।
















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