
पुलिस कप्तान मोए यान नाइंग ने अप्रैल में गवाही दी थी कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे व उसके अधीनस्थों को वा लोन को गुप्त दस्तावेज देने का आदेश दिया था.
उधर दोनों पत्रकारों ने गुहार लगाई थी कि उन्हें म्यांमार के ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट का उल्लंघन करने का दोषी ना ठहराया जाए. उन्होंने दलील दी थी कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ म्यांमार की क्रूर कार्रवाई के संबंध में खोजी पत्रकारिता करने और उसकी खबरें लिखने के लिए पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है.
इस मामले में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने बिना किसी का नाम लिए जोर देकर कहा था कि ‘हमें पत्रकारों की रिहाई के लिए भी दबाव जारी रखना चाहिए जो इस मानवीय त्रासदी पर रिपोर्ट कर रहे हैं.’
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