#सुनीलदत्त साहब #लखनऊ आये थे 1949 में । उनको किराये पर मकान मिला #गन्ने वाली गली में।
यहां उनकी पहचान थी “अख़्तर” के तौर पर। किराया था दो रुपये महीना। यहां उनके साथ माखी जानी भी आ गए थे रहने के लिए । माखी जानी, दत्त साहब के जिले झेलम से थे। माखी जानी हिंदी में मैक मोहन के नाम से जाने जाते थे।
उनकी पहचान फिल्म #शोले से सबसे ज्यादा बनी ,शोले में उनके किरदार का नाम था सांभा ।

एक दिन दत्त साहब का राज़ ख़ुल गया,लेकिन मकान न 102 से उनका नाता बना रहा। साल 2009 में संजय दत्त लखनऊ आये थे। इस मकान तक भी आये थे और आपा तो इस दुनिया में नहीं रहीं उनके वारिसान आज लखनऊ में हैं।
आज दत्त साहब की जयंती है। लखनऊ को तो भूलने आदत लग चुकी है। सो हमेशा की तरह दत्त साहब का लखनऊ कनेक्शन भी भूल गए।
मकान न 102 अब धीरे धीरे खण्डहर में तब्दील हो चुका है। शायद यह धरोहर जर्जर की सूची में नहीं है । बिल्ड़र भी इस मकान के ज़मींदोज़ होने के इंतज़ार में है ।
#लखनऊनगरनिगम को धरोहर की रक्षा करना नहीं आता है। वो सिर्फ नाले पर बने मकान दुकान की रक्षा के लिए तत्पर है।
अब उम्मीद यह है संजू बाबा इस ओर ज़रूर ध्यान देंगे।
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