इसके लिए रविवार को सैकड़ों लोगों ने इकट्ठा होकर अपनी सहमति जताई। मानव शृंखला में मुख्य रूप से वरिष्ठ पत्रकार हुसैन अफ़सर , प्रदीप कपूर, रुबीना जावेद मुर्तज़ा, उबेदुल्लाह नासिर, सरवर हुसैन, माधवी कुकरेजा, रूप रेखा वर्मा, रमेश दीक्षित, डॉ. संतोष, इकबाल किदवई और सुजीत के साथ कई जागरूक नागिरक मौजूद थे।

कासगंज और उसी तरह की कई और धार्मिक उन्माद की घटनाओं से भारत की अनूठी भाईचारे और ‘अनेकता में एकता’ की सभ्यता को ठेस पहुंची है. नफरतों को थामने और बांटे जाने से बचने के लिए ज़रूरी है कि हम एक साथ, कंधे से कन्धा मिला कर ये पैग़ाम दें कि हम एक हैं.















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