दूसरी अनुरोध यह थी कि जो सेक्शन का रेफ्यूजल था वह गलत था क्योंकि जो सरकार है उसने अपने ही हक़ ऑर्डर कर लिया था।
उन्हींने कहा कि कानून यूनिवर्सल प्रिंसिपल है कि एक अपराधी या जो व्यक्ति खुद शामिल हो वह अपना ऑर्डर खुद पास नहीं करा सकता। सेक्शन रेफ्यूजल ऑर्डर जो है वह मुख्यमंत्री ने खुद पास किया था।
इसलिए जब इसपर याचिका दायर की गई तो इसपर कोर्ट ने कहा कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई है और यह कहकर मुकदमा ख़ारिज कर दिया जबकि हम लोगों का बहस के दौरान यह कहना था कि जब जांच हो रही थी तो उस वक्त जांच करने वालों ने बहुत सारी गड़बड़ी की।














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