लखनऊ। पिछले दिनों एक अमेरिकी हवाई हमले में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। रविवार को लखनऊ में कासिम सुलेमानी की याद में एक जुलूस निकाला गया।

यह जुलूस अंजुमने गुनचाये मेहंदिया के नेतृत्व में हुसैनाबाद स्थित रईस मंजिल से निकाला गया। जुलूस में शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जव्वाद और दीगर ओलमा भी शामिल हुए। जुलूस में सैकड़ों लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।
जुलसू में बच्चे, बजुर्ग और महिलाओं भी शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका का पुतला बनाकर उसे जूतों की माला पहनायी और फिर आग लगा दी।

आपको बताते चले कि कासिम सुलेमानी ईरान का सबसे शक्तिशाली सैन्य कमांडर और खुफिया प्रमुख मेजर जनरल थे. जनरल सुलेमानी ईरान के सशस्त्र बलों की शाखा इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स या कुद्स फोर्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) की अध्यक्षता भी कर रहे थे. ये फोर्स सीधे देश (ईरान) के सर्वोच्च नेता यानि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है.
सुलेमानी ने 1980 के ईरान-इराक युद्ध की शुरुआत में अपना सैन्य करियर शुरू किया और साल 1998 से कुद्स फोर्स का नेतृत्व शुरू किया. इसे ईरान की सबसे ताकतवर फौज के रूप में जाना जाता है.
कुद्स फोर्स (Quds Force)
कुद्स फोर्स ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स की विदेशी यूनिट का हिस्सा है. इसे ईरान की सबसे ताकतवर और धनी फौज माना जाता है. कुद्स फोर्स का काम है विदेशों में ईरान के समर्थक सशस्त्र गुटों को हथियार और ट्रेनिंग मुहैया कराना. कासिम सुलेमानी इसी कुद्स फोर्स के प्रमुख थे.
















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