अलबत्ता प्रयोगशाला में अपने पसंदीदा विमान से लाए फौलादी नमूने ज़रूर सहेज दिए। इस प्रयोगशाला कनाडा शहर ‘हैलिफ़ैक्स डलहौजी विश्वविद्यालय में स्थित थी.ानीस साल गुजर गए और उनके नमूने में बसे कीटाणुओं इस्पात खा खाकर पलते रहे। अंत 2010 में एक और जिज्ञासु वैज्ञानिक ‘डाक्टरहनरेटा मान ने फैसला किया कि अनुसंधान किया’ टाइटैनिक इस्पात पर पलने बढ़ने वाले कीटाणुओं अंत किस प्रकृति के हैं?
titanic
जब बैक्टीरिया पर शोध हुई ‘तो प्रकट हुआ कि दुनिया में रूसी किसी भी जगह ऐसे बैक्टरिया नहीं पाए जाते … मानो रोगाणु क यक नए प्रकार खोज होगई.माहरीन ने टाई टैंक के नाम पर इस तरह को”हालो मूनस टाइटैनिक’ ‘(Halomonas titanicae) नाम दया.साइनस वैज्ञानिक नहीं जानते कि यह बैक्टीरिया टाइटैनिक पर कहां से आए मगर वह डूबने पोत इस्पात खाने के लहरें कर रहे हैं। याद रहे ‘टाई टैंक 50 हजार टन इस्पात से तैयार किया गया था। अब यही बेपनाह इस्पात हालो मूनस टाइटैनिक का मन भाता खा जाबन चुका।
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