10 अप्रैल 1909 की दोपहर जब ब्रिटिश बंदरगाह ‘साउथ हमपटन से यात्री जहाज’ आर एमएस टाइटैनिक अपनी पहली यात्रा पर रवाना हुआ ‘तो किसी को भ्रम व गुमान न था कि जल्द ही वह एक तबाह व बर्बाद संरचना के मामले अटलांटिक की तहखाने में जा गिरेगा। उस ज़माने में टाइटैनिक दुनिया के सबसे बड़े और आलीशान जहाज होने का सम्मान रखता था। यही नहीं यह इतनी अधिक व्यवस्था विकसित की गयी थी कि इस को”ान सिंक योग्य ” (unsinkable) कहा जाने लगा … ऐसा जहाज जो डूब ही नहीं सकता। लेकिन होता वही है जो भगवान चाहे!

तारों भरी रात में हिमस्खलन से टकरा कर टाई टैंक देखते ही देखते समुद्र में डूब गया। इस दुखद दुर्घटना में पंद्रह सौ से अधिक बहुमूल्य जाने गईं । ” इन सिंक योग्य ” टाई टैंक डूबने ब्रिटिश और अमेरिकी जनता को हिलाकर रख दिया। उन्होंने इस त्रासदी को दास्तानों ‘फिल्मों और लेख की स्थिति जीवित रखा। आज टाई टैंक जहाजों मानव इतिहास में कई उच्च गुण जैसे बहादुरी ‘कर्तव्य पहचान’ प्रेम ‘त्याग’ बलि आदि रूपक बन गया।
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