By Professor Nehaluddin Ahmad निगाहों में मंज़र ज़रा बदलने दो अभी, दिल को इस ख़ुशी में सँभलने दो अभी। मौसमों की तरह ख़ुशबू बिखरने दो अभी, निगाहों में नर्म उजालों को उतरने दो अभी। न मैं तुम स... Read more
By Professor Nehaluddin Ahmad निगाहों में मंज़र ज़रा बदलने दो अभी, दिल को इस ख़ुशी में सँभलने दो अभी। मौसमों की तरह ख़ुशबू बिखरने दो अभी, निगाहों में नर्म उजालों को उतरने दो अभी। न मैं तुम स... Read more
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