ज्ञात रहे कि बहरैन में 2011 से आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस शासन ने जून 2016 को बहरैन के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू शेख ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द कर दी थी। जून 2016 से वे अपने घर में नज़रबंद हैं।
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