भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आज गुरूवार को संसद में राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली।विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 19 मार्च बृहस्पतिवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली।
उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने पर गोगोई जैसे ही शपथ लेने निर्धारित स्थान पर पहुंचे, वैसे ही विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। बाद में गोगोई ने सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने विरोध करते हुए सदन का वॉक आउट किया।
My interview on CJI Ranjan Gagoi's nomination to Rajya Sabha.
Ranjan Gogoi's RS nomination calls all his judgments into question, says legal expert https://t.co/iaQ96sjv3O— Faizan mustafa (@ProfFMustafa) March 19, 2020
रंजन गोगोई को नामित किए जाने के बाद कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला, कपिल सिब्बल और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़े किए तो पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने उम्मीद जताई थी कि गोगोई इस प्रस्ताव को ठुकरा देंगे। हालांकि, रंजन गोगोई मीडिया से बातचीत में पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रपति के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया है। शपथ लेने से पहले रंजन गोगोई के राज्यसभा सदस्य के तौर पर नामिनेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मधु पूर्णिमा किश्वर ने याचिका लगाकर चुनौती दी थी। मधु किश्वर ने बिना किसी कानूनी प्रतिनिधि के इस बिना पर यह याचिका दायर कि है कि संविधान का मूल आधार ‘ज्यूडिशयरी की स्वतंत्रता’ है और इसे लोकतंत्र का स्तंभ माना गया है।
https://twitter.com/RanjanGagoi/status/1240606032306401280?s=20
उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य सीनियर जजों के साथ संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रंजन गोगोई, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के तौर-तरीकों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल खड़े करके चर्चा में आए थे। इसके बाद वे चीफ जस्टिस बने और राम मंदिर से लेकर सबरीमाला सहित को ऐतिहासिक फैसले दिए। ज्ञात रहे कि पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को हाल ही में राष्ट्रपति ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनित किया था।


















