बनारस हिंदू विश्वविधालय में संस्कृत विभाग में प्रोफेसर फिरोज खान के नियुक्ति को लेकर ABVP और RSS संगठन के छात्रों ने प्रदर्शन करके ये तो साबित कर दिया की मुसलमानों के प्रति कितनी नफरत भडी पड़ी है।

जहां एक तरफ मोदी सरकार ने नारा लगाया था कि सबका साथ सबका विकास और विश्वास जितने का वही ये नारा झूठा साबित हो गया। BHU में सिर्फ इसलिए विरोध किया गया क्योंकि वो फिरोज खान मुसलमान है।
वही दूसरी तरफ फिरोज खान के सपोर्ट में कई सारे छात्र संगठन ने साथ दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारा लगाया, और बड़े बड़े बैनरो के साथ प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थन किया।
एक बात तो साफ हो चुकी है कि मुसलमानों के खिलाफ किस कदर इस देश में नफरत के बीज बौये जा रहे है। लेकिन अभी भी इंसानियत परस्त लोग साथ दे रहे है।
आपको बता दे कि मुस्लिम समाज के होने के बावजूद फिरोज खान ने पांचवीं क्लास से संस्कृत की पढ़ाई शुरू की और फिर जयपुर के राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान से एमए और पीएचईडी की डिग्री हासिल किया। फिरोज खान ने कहा कि सभी धर्म एकता और प्रेम का संदेश देते हैं। लेकिन मुझे नही पता था कि एक दिन मेरा ये संस्कृत प्रेम मेरे खिलाफ इस्तेमाल होगा।
भारत में सदियों से गंगा-जमुनी तहजीब का जिक्र सुना था लेकिन मेरे साथ जो BHU में हुआ काफी डरा देने वाला हादसा था। उन्होंने कहा कि बचपन से लेकर पीएचईडी तक की शिक्षा प्राप्त किया, कभी धार्मिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।















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