लेकिन फिर 2017 में आडवाणी ने देश का राष्ट्रपति बनने का सपना संजोया। लेकिन आडवाणी के ख्वाब ना हुए बीरबल की खिंचड़ी हो गई जो कभी पकती ही नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आडवाणी को जोर का झटका देते हुए उनके ऊपर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। क्यूंकि राष्ट्रपति बनने के लिए पहली शर्त ही ये है कि इस पद का उम्मीदवार स्वच्छ छवि वाला होना चाहिए।
उस पर किसी प्रकार का दाग नहीं होना चाहिए। आडवाणी और जोशी दोनों यही उम्मीद पाले थे कि पार्टी खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनको राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करवा देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
हालांकि आडवाणी-जोशी पर जब बाबरी ढांचे का क्रिमिनल कॉन्सििपरेसी का केस चला, तभी इस बात के कयास लगाए जा रहे थे और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरु हो गई थी कि अब आडवाणी-जोशी का राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना मुश्किल है। लेकिन उसके बाद भी दोनों के मन में यह आस रही कि हो सकता है पार्टी और मोदी दोनों में से किसी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना दीजिए।
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