इल्म का नायाब ज़खीरा थे सुहैल आफंदी साहब। कुरान की आयत तफ़सीर के साथ मजलिस में पढ़ते थे और पड़ा लिखा मजमा उसे अपने पास नक़ल करता था। आज रात एक बजकर पच्चीस मिनट पर यह खबर मिली की सुहैल आफंदी साहब का इंतकाल हो गया। आँखों से अश्क जारी हुए फिर दिल ने कहा शायद यह ख़बर ग़लत हो। अभी कुछ मिनट भी नहीं हुए थे कि ख़बर आई कि हैदराबाद के जाफरिया अस्पताल में आफंदी साहब का इंतेक़ाल हुआ।कलम कांप रहा है यह लिखते हुए कि सुहैल आफंदी साहेब क़िबला का इंतेक़ाल हुआ
इल्म का नायाब ज़खीरा थे सुहैल आफंदी साहब। कुरान की आयत तफ़सीर के साथ मजलिस में पढ़ते थे और पड़ा लिखा मजमा उसे अपने पास नक़ल करता था। आज रात एक बजकर पच्चीस मिनट पर यह खबर मिली की सुहैल आफंदी साहब का इंतकाल हो गया। आँखों से अश्क जारी हुए फिर दिल ने कहा शायद यह ख़बर ग़लत हो। अभी कुछ मिनट भी नहीं हुए थे कि ख़बर आई कि हैदराबाद के जाफरिया अस्पताल में आफंदी साहब का इंतेक़ाल हुआ।















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