तेल की क़ीमतों में भारी कमी और यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की मार झेल रहे सऊदी अरब ने ख़र्चों में कटौती का एलान किया है।
अरब देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के वित्त मंत्री इब्राहीम अल-अस्साफ़ का कहना है कि तेल की क़ीमतों में गिरावट के कारण रियाज़ को अभूतपूर्व बजट घाटे का सामना है।
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन हालिया वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
सऊदी नरेश सलमान के साथ अमरीका की यात्रा के दौरान, वाशिंगटन में सीएनबीसी से बात करते हुए इब्राहीम अल-अस्साफ़ ने ख़र्चों में कटौती का ब्यौरा तो नहीं दिया, लेकिन ये ज़रूर कहा कि हम ख़र्चों में कटौती की योजना बना रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हालिया दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत प्रति बैरल घटकर 50 डॉलर तक पहुंच गई थी।
सऊदी वित्त मंत्री का कहना था कि जिन परियोजनाओं को पहले मंज़ूरी मिल चुकी है, उनमें अब कुछ देर हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी सरकार बजट घाटे की आपूर्ति के लिए अधिक बांड जारी करने की भी योजना बना रही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, जारी वर्ष में सऊदी अरब का बजट घाटा बढ़कर 130 अरब अमरीकी डॉलर हो जाएगा।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि घाटा इससे कहीं ज़्यादा होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की आर्थिक विकास दर में भी पिछले साल की विकास दर 3.5 प्रतिशत की तुलना में गिरावट आएगी।
उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब को कच्चे तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। इसलिए कि रियाज़ ने तेल उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए प्रतिदिन 1 करोड़ बैरल तेल निकालना शुरू कर दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब ने यह क़दम क्षेत्र में अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने और मास्को तथा तेहरान पर दबाव डालने के लिए उठाया था। लेकन आज शिकारी ख़ुद अपने जाल में फंस गया है।















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