अमेरिकी समाचार नेटवर्क CNN के अनुसार,व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों ने जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा कि क्या सऊदी अरब को हूतियों के खिलाफ इज़राइल की मदद लेनी चाहिए,

तो राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत जवाब दिया, “हाँ।” उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में इज़राइल, सऊदी अरब के लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है।
सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को सकारात्मक बताते हुए, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि सऊदी अरब और इज़राइल के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की संभावनाएँ और भी मजबूत हो सकती हैं।
हालाँकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस विषय पर सऊदी अरब और इज़राइल के बीच किसी नए समझौते या बातचीत फिर से शुरू होने की कोई घोषणा नहीं की।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को इज़राइली अखबार *हारारेत्ज़* की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों के खिलाफ इज़राइल से सैन्य सहायता लेने के प्रस्ताव में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस को डर था कि अगर इज़राइल के साथ खुलकर सैन्य सहयोग किया गया, तो सऊदी जनता की ओर से नकारात्मक प्रतिक्रिया आ सकती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) के तहत, अमेरिका की मध्यस्थता से कई अरब देशों ने इज़राइल को मान्यता दी है और उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं; लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प के कई आश्वासनों के बावजूद, सऊदी अरब अब तक इस मामले में हिचकिचा रहा है।















