श्रीलंका में सिलसिलेवार आतंकी हमले के बाद देश में रह रहे मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने दर्जनों निवासियों के हवाले से कहा है- श्रीलंका के नेगोम्बो शहर में ईसाई पुरुषों के गैंग एक-एक कर घरों में पहुंचे और खिड़कियां-दरवाजे तोड़ दिए. लोगों को खींचकर सड़कों पर लाया गया और पीटा गया. मार देने की धमकी दी गई. इस शहर में ईस्टर के मौके पर हुए धमाकों में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा में किसी की मौत की खबर नहीं है, लेकिन लोगों में काफी दहशत है. तमाम धर्मगुरुओं ने शांति की अपील की है, लेकिन देश में तनाव और डर लगातार बढ़ रहा है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 700 मुस्लिमों ने अपने घरों को छोड़ दिया है. कई मुस्लिमों ने कहा है कि वे छुपकर रह रहे हैं और सार्वजनिक जगहों से परहेज कर रहे हैं.
हालांकि, हफ्ते भर पहले तक श्रीलंका में ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच हिंसा का इतिहास नहीं रहा है. दोनों ही मजहब के लोग यहां अल्पसंख्यक हैं.
ACJU @muftirizwe says to HE @MaithripalaS that they submitted all the Information of ISIS terrorist in Srilanka to former defense sec @GotabayaR but no action was taken #lka #SRILANKA @akeenan23 @cfhaviland @Meerasrini @RadioPakistan @HarshadeSilvaMP @USAmbSLM @RamanayakeR pic.twitter.com/N2SNqhknRt
— Srilankan Muslims (@LankaMuslims) April 29, 2019
औरनजेब जाबी अपने दोस्त के घर खाना पका रहे थे, तभी उन्मादी भीड़ हाथों में लोहे के रॉड लेकर वहां आ गई. भीड़ ने घर को घेर लिया. जाबी ने दो बच्चों को पकड़ा और दीवार फांदकर आर्मी चेकप्वाइंट के पास पहुंचे.
इसी दौरान जाबी को भीड़ ने पकड़ लिया और पीटने लगे. भीड़ ने सैनिकों से मांग की कि इसे मारने दिया जाए. उन्होंने बच्चे को भी पीटा.
श्रीलंका में 7 फीसदी ईसाई, करीब 10 फीसदी मुस्लिम, 13 फीसदी हिन्दू रहते हैं. जबकि बौद्ध की संख्या 70 फीसदी है. यहां पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी मुसलमानों की कुछ संख्या भी रहती है.


















