बता दें कि अमेरिका ने इसी महीने की शुरुआत में अपनी घोषणा में कहा था कि वह यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के रूप में मान्यता देंगे और अमेरिकी दूतावास को यरूशलम में स्थांतरित करेंगे. उनकी घोषणा के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इसकी आलोचना भी की जा रही है.
ट्रंप के यरुशलम को इस्राइल की राजधानी की मान्यता देने से तुर्की के राष्ट्रपति का गुस्सा फूट पड़ा था. खुद को फिलस्तीनी मामलों के समाधान की धुरी मानने वाले एर्दोआन ने तभी से इस धारणा का विरोध करना शुरू कर दिया था जब इस बारे में घोषणा भी नहीं की गई थी. उन्होंने ट्रंप की इस घोषणा को ‘मुस्लिमों के लिए खतरे की घंटी’ बताया है, क्योंकि पूर्वी फिलस्तीनी क्षेत्र के नागरिक इसे अपने देश की भविष्य की राजधानी के तौर पर देखते हैं.















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