लखनऊ के शिया उलमा और दीगर सामाजी अफ़राद ने आज काज़मैन , और कश्मीरी मोहल्ले के रहने वाले अमन पसंद और अपनी रवायतों के तहफ़्फ़ुज़ करने के लिए कोशिशें करने वाले लोगों की अपील पर रौज़ा ऐ काज़मैन का दौरा कर के इस बेमिसाल इमारत जो आसार ए क़दीमा के ज़ेरे निगरानी है , के तहफ़्फ़ुज़ , और मरम्मत के लिए आवाज़ बलन्द की। 
अवध की गंगा जमुनी तहज़ीब की बेमिसाल इबारत पेश करती ये इमारत अवध की सबसे शानदार इमारतों में से एक है। उलमा के इसरार पर आए मशहूर वकील और आसार ए क़दीमा से इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद को बेमिसाल तरीके से तहफ़्फ़ुज़ कराने वाले मोहम्मद हैदर ने बताया कि इस बेमिसाल रौज़े की तामीर जगननाथ अग्रवाल (जो बाद में शरफ-उद-दौला गुलाम रजा के नाम से जाने जाते थे)

बादशाह अमजद अली शाह के दौर में उनके मंत्री थे, ने जमीन खरीदकर कराया इमारत का निर्माण कराया था। ये शानदार रौज़ा 31.08.1910 को गज़ट नोटिफिकेशन नंबर UP 1530-M/367-M से आसार ए क़दीमा (Archaeological Survey of India ) निगरानी आ गया।
मौजूदा वक़्त में इस रौज़े और इसके हॉल और छतों की हालत काफी बोसीदा है , और सहनचियाँ खत्म होने क्वे कगार पे हैं जिसके चलते तमाम ज़ायरीनों और इस क़दीमी मोहल्ले के रहने वालों ने उलमा से इसकी शिकायत की थी ।

मोहम्मद हैदर ने बताया कि २००२ से २०१८ के बीच आसार ए क़दीमा ने इस रौज़े की की तामीराती कामों में लगभग सवा करोड़ रुपये लगाए है और अभी इस रौज़े में जो तामीरी काम होना है उसमें भी काफी पैसे लगेंगे।

मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना सैफ अब्बास , मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी , अधिवक्ता यशब हुसैन रिज़वी , समाजसेवी ज़ुल्किफ़ल रिज़वी , दीगर उलमा और मोहम्मद हैदर ने इस सिलसिले में आसार ए क़दीमा के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट इंदु प्रकाश से राब्ता करते हुए उनसे इस सिलसिले में फौरी कार्यवाही के लिए एक दरख्वास्त भेजी है, जिसपर जल्द कार्यवाही की मांग की गई है।















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